रिटायरमेंट तक इंतज़ार क्यों? अभी रूपांतरित हों!
Photo Credit: Facebook रिटायरमेंट तक इंतज़ार क्यों? अभी रूपांतरित हों! आज की दुनिया में, आत्म-तृप्ति को सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के लाभ की तरह माना जाता है—एक ऐसा पुरस्कार जो जीवन के अंतिम पड़ाव को पार करने के बाद ही मिलता है। समाज का यह तयशुदा ढांचा टालमटोल पर ही ज़ोर देता है: पहले अपना करियर बनाएं, पर्याप्त धन संचित करें, हर पारिवारिक दायित्व को पूरा करें, और जीवन के अंतहीन बहीखाते को चुकता करें। जब बाल सफेद हो जाएं और ज़िम्मेदारियां कम पड़ जाएं, तभी आपसे शांत बैठकर आंखें मूंदने और ईश्वर या आंतरिक शांति की खोज करने की उम्मीद की जाती है। तब तक, जीवन केवल निपटाए जाने वाले दायित्वों का एक यांत्रिक सिलसिला बनकर रह जाता है। दिन जागने, काम करने, व्यवस्था संभालने और चिंताओं के अंतहीन चक्र में धुंधले होते चले जाते हैं। आप स्वयं को यह दिलासा देते रहते हैं कि शांति बस अगली मंज़िल पर ही है: "एक बार यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाए, फिर मैं आराम करूंगा।" "एक बार बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो जाएं, फिर मैं आध्यात्मिकता के लिए समय निकालूंगा।" मगर लक्ष्य हमेशा आगे खिसकता रहता है। एक क...