साधना की सरलता
Photo Credit: Pinterest साधना की सरलता आध्यात्मिक यात्रा अक्सर मन को जटिल लगती है। हम सोचते हैं कि ध्यान में विशेष तकनीकें चाहिए , उपलब्धियाँ चाहिए या प्रगति को मापना चाहिए। परंतु सत्य यह है कि साधना सरल है। ध्यान किसी जटिल विधि की मांग नहीं करता , केवल ईमानदारी और निरंतरता चाहता है। जब हम ध्यान के बारे में अधिक सोचते हैं , अपेक्षाएँ उत्पन्न होती हैं। अपेक्षाएँ मन को अशांत करती हैं और मौन को बाधित करती हैं। साधना का सार है — बस ध्यान करते रहना। ध्यान में बैठते समय विचार आएँगे , भावनाएँ उठेंगी , स्मृतियाँ आएँगी। यह स्वाभाविक है। गलती यह है कि हम इन विचारों को अपना मान लेते हैं। वास्तव में वे हमसे अलग हैं। वे बादल हैं और हम आकाश हैं। निरंतर अभ्यास से हम अनुभव करते हैं कि विचारों का वास्तविक आत्मा से कोई संबंध नहीं है। हम साक्षी हैं , शुद्ध चेतना हैं। श्री शिवकृपानंद स्वामी का हिमालयन समर्पण ध्यान साधना को सहज बना देता है। उनक...