सद्गुरु के सानिध्य में व्यक्ति विचारशून्य हो जाता है
Photo Credit: Instagram सद्गुरु के सानिध्य में व्यक्ति विचारशून्य हो जाता है सदियों से प्राचीन ग्रंथों और आत्म-साक्षात्कारी संतों ने एक जीवित सद्गुरु के प्रभामंडल में मौजूद दिव्य शक्ति का वर्णन किया है। वे बताते हैं कि कैसे किसी सिद्ध महापुरुष के पावन सानिध्य में आते ही मानवीय बुद्धि की निरंतर चंचलता स्वतः शांत हो जाती है। कई साधकों की तरह, मैंने भी इन बातों को बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ा था और केवल बौद्धिक स्तर पर ही समझा था। किंतु शब्द तब तक मात्र सिद्धांत रहते हैं जब तक कि प्रत्यक्ष अनुभूति विश्वास को अटूट निष्ठा में न बदल दे। मेरे जीवन में यह दिव्य मोड़ तब आया जब मेरी पहली बार हिमालयन समर्पण ध्यान के प्रणेता, पूज्यपाद श्री शिवकृपानन्द स्वामीजी से प्रत्यक्ष भेंट हुई। यह ऐतिहासिक भेंट पावन भूमि नेवासा में हुई, जहाँ मैं ट्रस्ट के प्रबंध मंडल (मैनेजमेंट बोर्ड) के एक सदस्य के रूप में गया था। स्वामीजी के समक्ष उपस्थित होने से पहले, हमारे मन अपनी सामान्य सांसारिक स्थिति में थे—विश्लेषणात्मक, सतर्क और प्रशासनिक दायित्वों, जिम्मेदारियों तथा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों में उलझे हुए। प्रबं...