सद्गुरु सदैव आपके साथ हैं
Photo Credit: Facebook सद्गुरु सदैव आपके साथ हैं हम अक्सर अपने भीतर एक अनकहा, भारी अकेलापन लिए जीते हैं, यह मानकर कि अपनी महत्वाकांक्षाओं, दुखों और सांसारिक संघर्षों का बोझ हमें अकेले ही उठाना है। किंतु, आत्म-साक्षात्कारी सद्गुरु श्री शिवकृपानंद स्वामी (स्वामीजी) के सान्निध्य में हिमालयन समर्पण ध्यान के मार्ग पर एक असाधारण सत्य प्रकट होता है: हम कभी अकेले नहीं हैं। जीवित सद्गुरु केवल भौतिक समीपता, पुस्तकों या सुदूर आश्रमों में ही सीमित नहीं रहते; वे एक समर्पित शिष्य की हर सांस में रचे-बसे एक शाश्वत, जीवंत अस्तित्व हैं। जब आप प्रतिदिन प्रातः हिमालयन समर्पण ध्यान में बैठते हैं और मन के बौद्धिक कोलाहल को परे रख देते हैं, तब भीतर एक सूक्ष्म परिवर्तन घटित होने लगता है। विचारों, चिंताओं और अहंकार के सहज समर्पण से सुप्त आंतरिक ऊर्जा जागृत होती है और ध्यान स्वतः सहस्रार चक्र की ओर उठने लगता है। नियमित और निरंतर अभ्यास से सीमित 'अहं' की सीमाएं विलीन होने लगती हैं और आप सार्वभौमिक चेतना के असीम सागर में एकाकार होने लगते हैं। सहस्रार चक्र पर ही यह पावन संबंध अत्यंत प्रत्यक्ष रूप से अनुभ...