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साक्षी चेतना

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  Photo Credit: Pinterest साक्षी चेतना साक्षी चेतना आध्यात्मिक जागरण का सार है। यह वह अवस्था है जहाँ हम ध्यान द्वारा भीतर की ओर मुड़ते हैं और आत्मनिरीक्षण करते हैं। शुरुआत में हम नाम , परिवार , शिक्षा और उपलब्धियों से परिभाषित होते हैं। ये अहंकार की परतें हैं। पर ध्यान गहराता है तो ये परतें हटने लगती हैं और आत्मा स्पष्ट होती जाती है। पहले हम देह चेतना से जुड़े रहते हैं। हम सोचते हैं कि हम शरीर हैं। पर ध्यान हमें दिखाता है कि शरीर केवल एक साधन है। जैसे ‑ जैसे हम भीतर जाते हैं , यात्रा देह चेतना से आत्मा चेतना की ओर होती है। गहराई में आत्मा उज्ज्वल होती है। ध्यान साधन है जो इस गहराई तक ले जाता है। श्री शिवकृपानंद स्वामी का हिमालयन समर्पण ध्यान पूर्ण समर्पण सिखाता है। समर्पण में अहंकार ढीला पड़ता है और मौन प्रकट होता है। शून्यता में साक्षी प्रकट होता है — विचारों से परे शुद्ध जागरूकता। साक्षी चेतना का अर्थ है सब कुछ बिना आसक्ति ...