हम ऊर्जा हैं – सीमाओं से परे
Photo Credit: Instagram हम ऊर्जा हैं – सीमाओं से परे मनुष्य निरंतर भौगोलिक आकांक्षा में जीता है। हमें लगता है कि शांति पहाड़ों की कुटिया या समुद्र किनारे के घर में मिलेगी। हम मानते हैं कि स्थान बदलने से चेतना बदल जाएगी। पर आत्मा के लिए भूगोल भ्रम है। यदि भीतर अशांति है, तो सबसे शांत दृश्य भी चिंता का पृष्ठभूमि बन जाएगा। सच्ची यात्रा भीतर की है आध्यात्मिक यात्रा एक स्थान से दूसरे स्थान की नहीं, बल्कि सीमित से असीम की है। कोई बाहरी यात्रा आंतरिक असंतुलन को ठीक नहीं कर सकती। सच्चा आगमन वहीं होता है जहाँ आप अभी खड़े हैं। आप ही प्रकृति हैं यह भ्रांति है कि प्रकृति से जुड़ने के लिए एकांत चाहिए। सत्य यह है कि आप प्रकृति को देखने नहीं जाते—आप स्वयं प्रकृति हैं। आपका शरीर पृथ्वी का अंश है। हर श्वास वातावरण से संवाद है। आपकी नसों में बहता जल और हड्डियों में खनिज पृथ्वी से निरंतर चक्रित होते रहते हैं। आप प्रकृति से अलग नहीं हो सकते। मनोवैज्ञानिक सीमाएँ छोड़ना प्रकृति से एकत्व दूर गाँव जाने से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक सीमाएँ छोड़ने से होता है। यदि आप एक क्षण भी बिना शरीर, मन या कल्पना ...