सहजता से स्वयं को शिथिल करें
Photo Credit: Elohee Retreat Centre सहजता से स्वयं को शिथिल करें आध्यात्मिक यात्रा प्रयास से नहीं, बल्कि सहजता से आरंभ होती है। ध्यान का सार शरीर को थकाने या मन को दबाने में नहीं, बल्कि जागरूकता में विश्राम करने में है। जब हम स्वयं को सहजता से शिथिल करना सीखते हैं, तो ध्यान बोझ नहीं, बल्कि आनंद बन जाता है। ध्यान में आराम ध्यान के लिए पहला कदम है शारीरिक आराम। स्थिर आसन, ढीले कंधे और रीढ़ की कोमल सीध ध्यान की नींव रखते हैं। जब शरीर स्थिर होता है, तो मन भीतर जा सकता है। लयबद्ध श्वास श्वास शरीर और चेतना के बीच सेतु है। लयबद्ध श्वास स्नायु तंत्र को शांत करती है और ऊर्जा को संतुलित करती है। प्रत्येक श्वास जीवन को ग्रहण करने का निमंत्रण है; प्रत्येक निःश्वास तनाव छोड़ने का अवसर है। श्वास और चित्त पर ध्यान श्वास पर ध्यान करते हुए चित्त को सहस्रार पर टिकाना मन को साधारण विचारों से ऊपर उठाता है। श्वास और चित्त का यह संयोजन हमें ध्यान की गहराई में ले जाता है। कृतज्ञता का विकास सच्चा विश्राम भावनात्मक भी है। कृतज्ञता हृदय को कोमल बनाती है और बेचैनी को मिटाती है। जीवन के उपहारों को य...