नियमित ध्यान करो – अशांति के वर्ष में दिव्यता से जुड़े रहो
Photo Credit: Facebook नियमित ध्यान करो – अशांति के वर्ष में दिव्यता से जुड़े रहो जीवन कभी स्थिर नहीं रहता। प्रत्येक वर्ष अपनी चुनौतियाँ लेकर आता है, लेकिन कुछ वर्ष अधिक अशांति से भरे होते हैं—प्राकृतिक आपदाएँ, मानव-निर्मित संघर्ष और व्यापक अनिश्चितता। ऐसे समय में भय और चिंता हमें आसानी से घेर सकते हैं। फिर भी, एक मार्ग है जिससे हम स्थिर, शांत और उच्च सत्य से जुड़े रह सकते हैं: ध्यान । शिवकृपानंद स्वामीजी , हिमालयीन समर्पण ध्यानयोग की परंपरा के माध्यम से बताते हैं कि ध्यान केवल एक साधना नहीं है, बल्कि जीवनरेखा है। यह वह सेतु है जो व्यक्तिगत आत्मा को सार्वभौमिक चेतना से जोड़ता है। जब बाहरी जगत में कोलाहल होता है, ध्यान हमें भीतर के आश्रय में ले जाता है, जहाँ मौन और दिव्यता निवास करते हैं। नियमित ध्यान से हम केंद्रित, संतुलित और सुरक्षित रहते हैं, चाहे बाहर कितने भी तूफ़ान क्यों न हों। स्वामीजी बताते हैं कि ध्यान मन के शोर को मिटाता है और आत्मा को सार्वभौमिक चेतना की तरंगों से जोड़ता है। इस जुड़ाव में भय और चिंता का प्रभाव समाप्त हो जाता है और साधक शांति और आनंद का अनुभव करता है। ध...