भक्ति: बुद्धिमत्ता का एक आयाम
Photo Credit: Facebook भक्ति: बुद्धिमत्ता का एक आयाम ज्ञान की आधुनिक खोज में बुद्धि (इंटेलेक्ट) को ही अक्सर सर्वोच्च मानवीय क्षमता मान लिया जाता है। हम विश्लेषण, वर्गीकरण और तर्कों में उलझे रहते हैं, यह सोचकर कि केवल विश्लेषणात्मक विचार ही जीवन के रहस्यों को खोल सकता है। किंतु बुद्धि की अपनी सीमाएं हैं; वह एक फूल की पंखुड़ियों को गिनने के लिए उसे काट तो सकती है, पर उसकी सुगंध का अनुभव कभी नहीं कर सकती। बुद्धि सत्य को दूर से जीतकर उस पर अधिकार पाना चाहती है, जबकि भक्ति बुद्धिमत्ता के एक भिन्न और विराट आयाम से संचालित होती है—यह सत्य को जीतने की कोशिश नहीं करती, बल्कि उसे अंगीकार कर साक्षात अनुभव करती है। मूल रूप से, भक्ति योग का अर्थ है मानवीय भावनाओं की तीव्रता का उपयोग करके अपनी व्यक्तिगत सीमाओं से परे जाना। जहां हमारा शरीर और तार्किक मन तीव्रता की उच्च अवस्था को लंबे समय तक बनाए रखने में संघर्ष करते हैं, वहीं भावनाएं एक ही क्षण में प्रचंड वेग पकड़ सकती हैं। जब वही भावनात्मक ऊर्जा सांसारिक वासनाओं या शिकायतों में बहती है, तो बंधन बन जाती है। किंतु जब उसी तीव्रता को अंतर्मुखी कर ...