अनुशासन और सरलता
Photo Credit: Pinterest अनुशासन और सरलता अनुशासन और सरलता जागरूकता के दो स्तंभ हैं। अनुशासन के बिना जागरूकता क्षणिक रहती है और सरलता के बिना जागरूकता धुंधली हो जाती है। वर्तमान में जीने के लिए दोनों आवश्यक हैं। अनुशासन कठोरता नहीं है , बल्कि निरंतरता है। यह जीवन की लय है जो हमें वर्तमान में स्थिर रखती है। प्रातः उठना , प्रतिदिन ध्यान करना , सजगता से भोजन करना और सरलता से जीना बोझ नहीं हैं , बल्कि स्थिरता और शांति लाते हैं। सुबह का समय शुद्ध होता है और ध्यान के लिए उपयुक्त होता है। ध्यान में अनुशासन का अर्थ मन को जबरन शांत करना नहीं है , बल्कि बार ‑ बार अभ्यास में लौटना है। यही निरंतरता मन को बदल देती है। भोजन में अनुशासन भी आवश्यक है। भोजन केवल शरीर का ईंधन नहीं है , यह चेतना को भी प्रभावित करता है। जब हम सजगता से खाते हैं और सरलता चुनते हैं , तो शरीर और आत्मा दोनों पोषित होते हैं। अनुशासन का अर्थ संतुलन है , न कि वंचना। सरलत...