कृपा सूक्ष्म है – उसे पकड़ने के लिए सजग रहें
Photo Credit: Pinterest कृपा सूक्ष्म है – उसे पकड़ने के लिए सजग रहें हम ऐसे संसार में जीते हैं जो निरंतर हमारा ध्यान खींचता है—सूचनाएँ, समयसीमाएँ, यातायात। हमारा मन ऊँचे और नाटकीय अनुभवों का आदी हो गया है। इसलिए हम अक्सर अपेक्षा करते हैं कि आध्यात्मिक अनुभव या दिव्य हस्तक्षेप किसी बड़े चमत्कार के रूप में आएगा। परंतु कृपा शोर नहीं करती। कृपा अत्यंत सूक्ष्म है। कृपा का प्रवाह स्वामीजी की कृपा साधकों की ओर निरंतर प्रवाहित होती है। प्रश्न यह है कि क्या हमारे भीतर ग्रहणशीलता है? यदि कृपा अत्यधिक प्रकट होती, तो यह हमारे स्वेच्छा को दबा देती। परंतु आध्यात्मिकता स्वेच्छा और सचेत संरेखण का मार्ग है। कृपा आपकी स्वतंत्रता का सम्मान करती है और आपके सजग होने की प्रतीक्षा करती है। स्थूल और सूक्ष्म आयाम लोग अक्सर अपने मार्ग की पुष्टि के लिए बड़े संकेत या चमत्कार खोजते हैं। परंतु कृपा सूक्ष्म आयाम में कार्य करती है। स्थूल आयाम हैं—जीवित रहना, शारीरिक आवश्यकताएँ, तर्क। सूक्ष्म आयाम हैं—अंतर्ज्ञान, गहरी शांति, एकत्व की अनुभूति। कृपा सूक्ष्म में ही प्रकट होती है। रेडियो का उदाहरण विचार कीजिए ...