क्या हमारा कोई भविष्य है?
Photo Credit: Reddit क्या हमारा कोई भविष्य है? “क्या हमारा कोई भविष्य है?” यह प्रश्न केवल समय या अस्तित्व का नहीं, बल्कि चेतना का है। भविष्य कोई दूरस्थ स्थान नहीं है जो हमारा इंतजार कर रहा हो; यह चेतना का परिवर्तन है। जब हमारी चेतना विकसित होती है, तो भविष्य सामंजस्यपूर्ण रूप से खुलता है। जब यह स्थिर हो जाती है, तो भविष्य अनिश्चित लगता है। इस प्रश्न के केंद्र में आत्मा है। आत्मा शाश्वत है—यह शरीर के साथ नष्ट नहीं होती और न ही समय से बँधी है। शरीर वृद्ध होता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं, पर आत्मा अपनी यात्रा जारी रखती है। इस दृष्टि से भविष्य बाहरी घटनाओं का नहीं, बल्कि आत्मा के आंतरिक विकास का है। मनुष्य को स्वतंत्र इच्छा का वरदान मिला है। इसका अर्थ है कि हम भाग्य के निष्क्रिय पात्र नहीं, बल्कि अपने भविष्य के सक्रिय निर्माता हैं। हर विचार, हर शब्द और हर कर्म आगे का मार्ग बनाता है। स्वतंत्र इच्छा के माध्यम से हम अज्ञान के स्थान पर जागरूकता, स्वार्थ के स्थान पर करुणा और अहंकार के स्थान पर समर्पण चुन सकते हैं। ऐसा करके हम न केवल अपना व्यक्तिगत भविष्य बनाते हैं, बल्कि मानवता के सामूहिक ...