निर्भरता से मुक्ति
Photo Credit: Pinterest निर्भरता से मुक्ति निर्भरता से मुक्ति सबसे गहन स्वतंत्रता है। वर्तमान में जीने का अर्थ है स्वयं में इतना स्थिर होना कि किसी की उपस्थिति या अनुपस्थिति हमारी शांति को प्रभावित न करे। यह उदासीनता नहीं है , बल्कि सच्ची स्वतंत्रता है। जन्म से ही हम दूसरों पर निर्भर होते हैं — परिवार पर प्रेम के लिए , मित्रों पर संगति के लिए , समाज पर पहचान के लिए। जब हमारी शांति इन पर निर्भर हो जाती है , तो दुख उत्पन्न होता है। प्रशंसा हमें प्रसन्न करती है , आलोचना हमें चोट पहुँचाती है। यही निर्भरता है। निर्भरता से मुक्ति का अर्थ जीवन से भागना नहीं है। यह जीवन में पूर्ण भागीदारी है , पर केंद्रित रहकर। हम परिवार और मित्रों से जुड़े रहते हैं , पर हमारी शांति उन पर निर्भर नहीं होती। हम प्रेम करते हैं , पर अधिकार नहीं जताते। हम देखभाल करते हैं , पर आसक्ति नहीं रखते। ध्यान इस स्वतंत्रता का मार्ग है। ध्यान में बैठकर हम साक्षी को अ...