दैनिक जीवन में एक ठहराव
Photo Credit: Facebook दैनिक जीवन में एक ठहराव दैनिक जीवन अक्सर एक बवंडर जैसा लगता है। जिम्मेदारियाँ, समयसीमाएँ, बातचीत और विकर्षण हमें लगातार आगे बढ़ाते रहते हैं, जिससे साँस लेने की भी जगह नहीं मिलती। इस निरंतर भागदौड़ में हम शायद ही कभी अपने भीतर झाँकते हैं। परंतु ठहराव आवश्यक है। ठहराव में ही हम अपने भीतर से जुड़ते हैं, संतुलन पाते हैं और वर्तमान क्षण की सच्चाई का अनुभव करते हैं। ध्यान हमें यह ठहराव देता है। यह जीवन से भागना नहीं है, बल्कि उसे गहराई से जीना है। जब हम मौन में बैठते हैं, तो हम शोर और अव्यवस्था से दूर हो जाते हैं। हम विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं के प्रवाह को देखना शुरू करते हैं। प्रारंभ में मन विरोध करता है, अतीत या भविष्य की ओर दौड़ता है। लेकिन कोमल जागरूकता के साथ ठहराव फैलता है और हम भीतर की स्थिरता खोजते हैं। जागरूकता में जीना साक्षी बनना है। जीवन की दौड़ में उलझने के बजाय हम उसे देखते हैं। हम उठते विचारों को देखते हैं, उमड़ती भावनाओं को देखते हैं और अपने कर्मों को देखते हैं। यह साक्षीभाव न तो निर्णय करता है और न ही हस्तक्षेप करता है; यह केवल देखता है। देखने...