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वह ज्योति जो आत्मा को जागृत करती है

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  Photo Credit: Instagram वह ज्योति जो आत्मा को जागृत करती है आध्यात्मिक मार्ग को अक्सर भीतर की यात्रा कहा जाता है—अपने वास्तविक स्वरूप की ओर लौटना। परंतु इस विशाल आंतरिक क्षेत्र में चलना कभी‑कभी घने अंधकारमय वन में चलने जैसा लगता है। भारतीय परंपरा में—विशेषकर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर—गुरु की उपस्थिति उस दीपक के समान मानी जाती है जो इस मार्ग को प्रकाशित करता है। क्या गुरु की आवश्यकता है? सत्य तो आपके भीतर ही है, परंतु बिना मार्गदर्शन के उसे पहचानना अत्यंत दुर्लभ है। जैसे कोई व्यक्ति केवल प्रयोग और भूल से चिकित्सा या विज्ञान सीख सकता है, वैसे ही गुरु का मार्गदर्शन असंख्य जन्मों की भटकन से बचाता है। गुरु आपको बाँधने वाला नहीं, बल्कि आपकी स्वयं निर्मित सीमाओं, पैटर्न और भ्रांतियों से मुक्त करने वाला होता है। वे आपके परम स्वरूप का दर्पण होते हैं। पहले गुरु कौन थे? योगिक परंपरा में पहले गुरु आदियोगी शिव माने जाते हैं। लगभग 15,000 वर्ष पूर्व हिमालय की ऊँचाइयों में आदियोगी ने पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया और अपनी अनुभूति सात शिष्यों—सप्तऋषियों—में प्रवाहित की। गुरु पूर्णिमा के पूर्णिमा दि...