सच्चा सुख केवल आत्मा से आता है
Photo Credit: Dadabhagwan.com सच्चा सुख केवल आत्मा से आता है सुख की खोज में अधिकांश लोग बाहर की ओर देखते हैं—संपत्ति, उपलब्धियाँ, संबंध या भौतिक सुखों की ओर। ये स्रोत क्षणिक आनंद दे सकते हैं, लेकिन स्थायी नहीं होते। भौतिक सुख अस्थायी है; परिस्थितियों के साथ बदलता रहता है। शिवकृपानंद स्वामीजी बताते हैं कि सच्चा सुख केवल आत्मा से आता है। यह बाहरी जगत पर निर्भर नहीं है, बल्कि भीतर से स्वतः प्रवाहित होता है। स्वामीजी समझाते हैं कि आत्मा हमारे अस्तित्व का शाश्वत केंद्र है। यह मन के उतार-चढ़ाव और जीवन की परिस्थितियों से अछूता रहता है। जब हम शरीर या अहंकार से पहचान करते हैं, तो सुख नाजुक हो जाता है। लेकिन जब हम आत्मा में विश्राम करते हैं, तो सुख स्थिर, उज्ज्वल और निःशर्त हो जाता है। ध्यान इस आंतरिक आनंद का द्वार है। समर्पण ध्यान में साधक सहस्रार पर चित्त को गुरु तत्व को अर्पित करता है। मन शांत होता है, अहंकार मिटता है और आत्मा जागृत होती है। इस जागृत अवस्था में सुख बाहर नहीं खोजा जाता, बल्कि भीतर पाया जाता है। आत्मा का आनंद क्षणिक नहीं, बल्कि स्थायी है, क्योंकि यह शुद्ध चेतना से उत्पन...